मैं तो तुम्हारा ही एक हिस्सा हूं. तुम जो भी देते हो, कमी-बेशी करके वैसा ही निकालने की कोशिश करता हूं. परसों ललका साग दिए थे तो सूद समेत वापस किये थे कि नहीं? हां, ज्यादा तेल मसाला दे देते हो तो उसमें मेरा क्या कसूर? गर्मी होती है उसमें, जल जाता हूं, तब गुस्से में काला निकालता हूं. भाभी उस दिन खूब गोल-गप्पे खाईं, इसमें भी मेरा कसूर है? इंफेक्शन हो गया, मेरा लीवर ही काम करना बंद कर दिया. दू दिन तक एक किनारे रूठ के पड़ा रहा. जो भी उन्होंने दिया मैंने छुआ भी नहीं. सब वैसे ही निकलने दिया, पानी भी. पर तुम मेरा दर्द क्यूं समझो? तुम्हारे ही किसी गलती के कारण जब खुद को एकदमे कड़ा कर देता हूं, तुम्हें तो सिर्फ वो दर्द याद रहता है न?
तुम हगे पे हगते हो, मूते पे मूतते हो, मुझे दुर्गंध में छोड़ जाते हो. क्या मुझे तकलीफ नहीं होती? क्या मैं तुम्हारे लिए इतना त्याज्य हो गया? दो-चार दिनों के लिए अगर मैं तुम्हें त्याग दूं तो? कभी सोचा है क्या बीतेगी तुम पे और तुम्हारे पादने से समाज पे? तुम्हारी जग-हंसाई हो जाएगी. इसीलिए मैंने कभी भी खुद को तुमसे जुदा नहीं किया. तुम लाख जोर लगाते हो, मेरे निकलने पर प्रफुल्लित हो जाते हो फिर भी मैं कहीं न कहीं तुममें मौजूद रहता हूं. तुम्हारे लिए मेरा यह प्यार निःस्वार्थ है. इसके बदले मैंने तुमसे कुछ भी नहीं मांगा. फिर तुम क्यूं इतने निष्ठुर हो रहे हो? क्यूं मेरी तरक्की पर जल-भून रहे हो? क्यूं मेरी तरक्की को राष्ट्रीय विवाद बनाने पे तुले हुए हो?
मेरी भी इज्जत है. मैं भी अपने समाज में सर उठा के चलना चाहता हूं. पर तुम्हें क्या? जब चाहा, जैसे चाहा, जहां चाहा, मुझे निकाल देते हो. तनिक भी दया नहीं आती तुम्हें मुझपे? जब सूअर, कुत्ते, चील-कौए मुझे नोंच-नोंच के खा रहे होते हैं, क्या तुम्हारा हृदय द्रवित नहीं होता? क्या तुम नहीं चाहते कि मेरा भी एक घर हो? अगर है तो उससे भी अच्छा हो? खुद तो अपनी अय्याशी के लिए हमेशा कुछ न कुछ खरीदते रहते हो, मैंने कभी शिकायत की? लेकिन आज चुप नहीं बैठूंगा. और न ही अपने समाज को बैठने दूंगा. अब हममें भी चेतना आ गयी है. तुम्हारा ब्राह्मणवादी रवैया अब बर्दास्त नहीं. नव भारत का निर्माण अब गुह सम्मान के साथ ही होगा.
साफ-सुथरी और सुगंधित जगह हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है. और हम ऐसे ही जगह पे निकलेंगे. योजना आयोग तो एक बहाना है, पूरे देश में ऐसे ही पखाने बनाना है. जय हिंद.... जय भारत.... जय पाखाना.....